आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ,
कब तक चलूँगा ईमान रास्ते पर कभी तो भटक ही जाऊँगा ।
लड़ता रहूँगा ताउम्र सच की खातिर,
जब पेट पर आयेगी तो बहक भी जाऊँगा ,
आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ।
कब चलता रहूँगा सूने रास्तों पर ,
कभी तो किसी बेईमान दुपहिये पर लटक ही जाऊँगा ,
आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ।
कभी तो किसी बेईमान दुपहिये पर लटक ही जाऊँगा ,
आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ।
चटकते सब है चटकूँगा मै भी पर ,
दो चार को आईना दिखा ही जाऊँगा ,
आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ।
दो चार को आईना दिखा ही जाऊँगा ,
आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा ।