न मैं हिन्दू हूँ ,
न मैं मुस्लिम हूँ ,
रंजिशों की चौखट पर ,
रोती, पुत्र रक्त से नहलायी गयी माँ हूँ ,
हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।
न मैं मंदिर हूँ ,
न मैं मस्जिद हूँ ,
वोट बैंक की लूट पर ,
प्रेम धर्म बतलाने वाली जीवन की घोर निराशा हूँ ,
हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।
न मैं लक्ष्मीबाई हूँ ,
न मैं रजिया सुल्ताना हूँ ,
राम खुदा के नाम पर ,
लूटी अस्मत वाली नंगी आँखों का निवाला हूँ ,
हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।
न मैं बच्ची हूँ ,
न मैं बुढिया हूँ ,
दंगो के मेलो पर ,
सब हाथों से मरोड़ी गयी गुड़िया हूँ ,
हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।
(अयोध्या को हम सभी अपने धार्मिक पूर्वाग्रहों से देखते है ,कभी उस शहर की नजरों से नहीं देखते ।जो सरयू तट पर बैठ कर अपने दाग धोना चाहता है ।)